हे योगी...
भाजपइयों का अतिवाद दक्षिण के नायकों के मानिंद है, मसलन संसद में पहला कदम प्रधान सेवक मोदी ने सीढ़ियों पर माथा टेक कर रखा और दुनिया भर की मीडिया की सुर्खियों में विश्व विजेता के रूप में सामने आए. विदेशों के ताबड़तोड़ दौरों से विदेश मंत्री का अस्तित्व ही खत्म कर दिए. मोदी... मोदी... मोदी... के नारों से ब्रहृमांड गूंज उठा. अचानक से नोेटबंदी लागू कर जैसे कालाधन का नामोनिशान मिटा दिया हो, जिसे लागू करने के लिए मनमोहन सिंह जैसा अर्थशास्त्री सालों तक सिर्फ विचार करता रहा. देश को एक करसूत्र में बांधने वाला जीएसटी भी अभूतपूर्व रहा. व्यापारियों के अभी तक कुछ पल्ले नहीं पड़ा है. कैशलेस व्यवस्था का हाल तो आप लोग देख ही रहे हैं. पता नहीं किसानों की आय दोगुनी करने की बात कही गई थी या उनकी आत्महत्याओं की. पलायन रोकने के लिए नौजवानों को रोजगार दिया जा रहा था, ये और बात है कि नोटबंदी ने हजारों उद्योगों पर ताला जड़ दिया और रोजगार के सिलसिले में पलायन कर गए बड़ी तादात में युवाओं को घर लौटना पड़ा. विनोद दुआ के शब्दों हमारे प्रधान सेवक किसी जादूगर की तरह हैं, ताश के पत्तों की तरह हाथ दो बार फेंटते हैं और चमत्कार हो जाता है.
कुछ ऐसे ही चमत्कारी हैं प्रधान सेवक के दूसरे वर्जन योगी आदित्यनाथ, बोले तो गरीबों के मसीहा टाइप. चार बार लगातार गोरखपुर से बतौर सांसद संप्रदाय विशेष के खिलाफ सार्वजनिक मंचों से गरजते रहे. गो और हिन्दूओं की रक्षा के नाम पर हिन्दू युवा वाहिनी नामक सेना का गठन कर हजारों नौवजवानों को गुमराह किया; उनमें नफरत के बीज बोए, उन्ही को गोरक्षा के नाम पर अब देशभर में हत्या करने की खुली छूट मिल गई है; योगी ने जब अप्रत्याशित रूप से उत्तर प्रदेश की कमान संभाली तो गोरखपुर में बतौर मुख्यमंत्री पहली सभा को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश के चोर, गुंडा, माफिया, हत्यारे या तो सुधर जाएं या प्रदेश छोड़ कर चले जाएं नहीं तो उनके लिए दो ही जगह बचेगी. लगा कि प्रदेश में अब कानून व्यवस्था चुस्त हो जाएगी और अपराध जैसा शब्द ही लोग भूल जाएंगे. पर उसके बाद हत्याओं का जो सिलसिला शुरू हुआ उससे आप लोग बखूबी वाकिफ है. उसके बाद योगी सरकार ने एंटी रोमियो स्क्वाड का गठन किया. जिसकी आड़ में उनके गुर्गों ने कितने युगलों के साथ बेशर्मी की हदें पार कर दीं. फिर योगी सरकार ने प्रदेश की सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के लिए महकमे को 21 जून तक का वक्त दिया पर यूपी की सड़कों की दशा पहले से और बदतर हो चुकी है. योगी सरकार की यह सब घोषणाएं बिल्कुल किसी चमत्कार जैसी रहीं. जनता में ऐसी सनसनी पैदा हुई कि लगा धरती से दानवों का अंत करने के लिए ईश्वर ने जन्म ले लिया है. योगी सरकार के रंग का असर ऐसा पड़ा कि हेलमेट की जगह गेरुआ अंगोछे ने ले लिया और गाड़ी के नेमप्लेट पर योगी सेवक चस्पा हो गया. ऐसा करने से राष्ट्रवादियों को कुछ भी करने की छूट मिल गई.
बतौर सांसद योगी आदित्यनाथ ने पूर्वांचल में इंसेफेलाइटिस से हो रही मौतों को खूब भुनाया. जुलूस धरना—प्रदर्शन करने से लेकर सदन तक में इस मुदृे पर घड़ियाली आंसू बहाए. सरकारों पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए निरंतर कठघरे में खड़ा करते रहे. और अब जबकि खुद सत्तासीन हैं, बावजूद इसके बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 68 लाख के बकाए के कारण कंपनी आॅक्सीजन की सप्लाई रोक देती है और 60 बच्चों की मौत हो जाती है. योगी सरकार इस घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेने के बजाए इसे साधारण घटना बता रही है. उनके मंत्री के अनुसार अगस्त में बच्चों की मौतें होती ही होती हैं. इससे शर्मनाक और अमानवीय कुछ भी नहीं हो सकता है. जिन बच्चों की मौत पर पूरा देश रो रहा है उन पर सरकार के मंत्री संवेदना जताने और उसकी नैतिक जिम्मेदारी लेने की बजाए ऐसे वाहियात बयान दे रहे हैं.
यह समय बेहद खतरनाक है. झूठ को इतनी सच्चाई से सामने लाया जा रहा है कि वो सच लगे. इतिहास से खिलवाड़ किया जा रहा है. नेहरू का चरित्र हनन कर हेडगेवार और गोडसे को स्थापित किया जा रहा है. जवान और शहीदों के नाम पर राजनीति को चमकाया जा रहा है. राष्ट्रभक्ति के नाम पर लोगों को उन्मादी बनाया जा रहा है. विरोध करने वालों की हत्या की जा रही है. मीडिया सरकारों की अनुमति से खबरों को प्रसारित कर रही है. क्या दिखाना है और क्या हटाना है यह संपादक नहीं सरकार तय कर रही है. सोशल मीडिया पर गिरोह सक्रिय है. भोली—भाली जनता को मोदी चालिसा का पाठ पढ़ाया जा रहा है. राष्ट्रवादी नायक अक्षय कुमार को रुस्तम जैसी घटिया फिल्म के लिए नेशनल अवार्ड दिया जा रहा है और दंगल जैसी मिल्म बनाने वाले आमिर खान को देशद्रोही बताया जा रहा है. यह देश अब तक के सबसे खतरनाक समय से गुजर रहा है.
कुछ ऐसे ही चमत्कारी हैं प्रधान सेवक के दूसरे वर्जन योगी आदित्यनाथ, बोले तो गरीबों के मसीहा टाइप. चार बार लगातार गोरखपुर से बतौर सांसद संप्रदाय विशेष के खिलाफ सार्वजनिक मंचों से गरजते रहे. गो और हिन्दूओं की रक्षा के नाम पर हिन्दू युवा वाहिनी नामक सेना का गठन कर हजारों नौवजवानों को गुमराह किया; उनमें नफरत के बीज बोए, उन्ही को गोरक्षा के नाम पर अब देशभर में हत्या करने की खुली छूट मिल गई है; योगी ने जब अप्रत्याशित रूप से उत्तर प्रदेश की कमान संभाली तो गोरखपुर में बतौर मुख्यमंत्री पहली सभा को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश के चोर, गुंडा, माफिया, हत्यारे या तो सुधर जाएं या प्रदेश छोड़ कर चले जाएं नहीं तो उनके लिए दो ही जगह बचेगी. लगा कि प्रदेश में अब कानून व्यवस्था चुस्त हो जाएगी और अपराध जैसा शब्द ही लोग भूल जाएंगे. पर उसके बाद हत्याओं का जो सिलसिला शुरू हुआ उससे आप लोग बखूबी वाकिफ है. उसके बाद योगी सरकार ने एंटी रोमियो स्क्वाड का गठन किया. जिसकी आड़ में उनके गुर्गों ने कितने युगलों के साथ बेशर्मी की हदें पार कर दीं. फिर योगी सरकार ने प्रदेश की सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के लिए महकमे को 21 जून तक का वक्त दिया पर यूपी की सड़कों की दशा पहले से और बदतर हो चुकी है. योगी सरकार की यह सब घोषणाएं बिल्कुल किसी चमत्कार जैसी रहीं. जनता में ऐसी सनसनी पैदा हुई कि लगा धरती से दानवों का अंत करने के लिए ईश्वर ने जन्म ले लिया है. योगी सरकार के रंग का असर ऐसा पड़ा कि हेलमेट की जगह गेरुआ अंगोछे ने ले लिया और गाड़ी के नेमप्लेट पर योगी सेवक चस्पा हो गया. ऐसा करने से राष्ट्रवादियों को कुछ भी करने की छूट मिल गई.
बतौर सांसद योगी आदित्यनाथ ने पूर्वांचल में इंसेफेलाइटिस से हो रही मौतों को खूब भुनाया. जुलूस धरना—प्रदर्शन करने से लेकर सदन तक में इस मुदृे पर घड़ियाली आंसू बहाए. सरकारों पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए निरंतर कठघरे में खड़ा करते रहे. और अब जबकि खुद सत्तासीन हैं, बावजूद इसके बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 68 लाख के बकाए के कारण कंपनी आॅक्सीजन की सप्लाई रोक देती है और 60 बच्चों की मौत हो जाती है. योगी सरकार इस घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेने के बजाए इसे साधारण घटना बता रही है. उनके मंत्री के अनुसार अगस्त में बच्चों की मौतें होती ही होती हैं. इससे शर्मनाक और अमानवीय कुछ भी नहीं हो सकता है. जिन बच्चों की मौत पर पूरा देश रो रहा है उन पर सरकार के मंत्री संवेदना जताने और उसकी नैतिक जिम्मेदारी लेने की बजाए ऐसे वाहियात बयान दे रहे हैं.
यह समय बेहद खतरनाक है. झूठ को इतनी सच्चाई से सामने लाया जा रहा है कि वो सच लगे. इतिहास से खिलवाड़ किया जा रहा है. नेहरू का चरित्र हनन कर हेडगेवार और गोडसे को स्थापित किया जा रहा है. जवान और शहीदों के नाम पर राजनीति को चमकाया जा रहा है. राष्ट्रभक्ति के नाम पर लोगों को उन्मादी बनाया जा रहा है. विरोध करने वालों की हत्या की जा रही है. मीडिया सरकारों की अनुमति से खबरों को प्रसारित कर रही है. क्या दिखाना है और क्या हटाना है यह संपादक नहीं सरकार तय कर रही है. सोशल मीडिया पर गिरोह सक्रिय है. भोली—भाली जनता को मोदी चालिसा का पाठ पढ़ाया जा रहा है. राष्ट्रवादी नायक अक्षय कुमार को रुस्तम जैसी घटिया फिल्म के लिए नेशनल अवार्ड दिया जा रहा है और दंगल जैसी मिल्म बनाने वाले आमिर खान को देशद्रोही बताया जा रहा है. यह देश अब तक के सबसे खतरनाक समय से गुजर रहा है.
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